Monday, February 25, 2019

“通俄门”纷争升级 美民主党人要求公开完整报告

  中新网2月25日电 据美国中文网报道,在美国“通俄门”特别检察官穆勒23日公布对特朗普前竞选经理马纳福特量刑法庭文件后,特朗普竞选团队“通俄门”丑闻调查再升级。24日,众院情报委员会主席、民主党人希夫表示,若“通俄门”调查完整报告不能全部公开,他将使用传唤权召集穆勒进行质询,并会在必要时候将特朗普政府告上法庭。

  24日,情报主席希夫说,他的委员会将关注司法部长巴尔是否“试图隐瞒这份报告的任何部分。”他还警告说,巴尔将会受到严密的审查,并给予压力让他完全发布穆勒的“通俄门”调查报告。

  “我们将在必要时将其(特朗普政府)告上法庭,”希夫说,“如果他(巴尔)试图隐瞒,试图隐瞒本报告的任何部分,那将成为他遗留下来的问题,这将是一个不光彩的问题。因此,我认为此举不仅会给部门带来巨大的压力,还会给即将上任的司法部长带来巨大压力”。

  据报道,外界注意到,穆勒近日或已经结束了为期近2年的“通俄门”调查。负责监督该调查的司法部长巴尔表示,他希望尽可能多地发布有关调查的信息。但在上个月的提名听证会上,巴尔也明确表示,他最终将决定公众所看到的内容,并且任何报告都将以他的话来叙述,而不是穆勒的语言。

  24日,希夫表示,任何穆勒的完整报告都不足以满足民主党的要求。他指出公众有兴趣看到一些潜在的证据,例如从长期的特朗普顾问斯通和前特朗普竞选主席马纳福特的调查中收集到的信息。希夫表示,他的委员会计划扩大调查范围,检查外国政府是否对特朗普及其亲属或同事造成影响。

  斯通此前已经因向国会撒谎而被起诉,而马纳福特也被指控多次向调查人员撒谎,包括他与俄罗斯人的互动,后者被认为与美国有联系的商业伙伴,并且和俄罗斯情报部门有关系。

  “巴尔在他的证词中承诺尽可能公开报道。法律允许他做到这一切。我们将坚持将其公之于众”,希夫说,“除了通过司法部之外,没有别的方法可以获取被查获的信息,如果没有,我们无法完全告诉全国究竟发生了什么事情。”

  有报道称,民主党人可能将穆勒的调查结果作为弹劾程序的基础。在22日的一封公开信中,民主党警告不要隐瞒特朗普的信息,因为司法部认为总统不能被起诉。“我们将深入追究到底,”希夫说,“如果总统认真对待他所有的免责声明,那么他应该欢迎这份报告的发表。”

  报道称,有人猜测,穆勒很快就会向司法部提交报告,尽管该部门表示此事预计不会在本周发生。

Wednesday, February 6, 2019

लोकसभा चुनाव 2019: क्या उत्तर प्रदेश में कभी कांग्रेस के अच्छे दिन आएंगे?

लखनऊ के नज़दीक बाराबंकी लोकसभा चुनावी क्षेत्र में ग़रीब किसानों का समुराय नाम का एक गांव है. इस गांव की अर्थव्यवस्था गन्ने की खेती पर टिकी है. जब मैं वहां पहुंचा तो कांग्रेस के कार्यकर्ता एक सभा कर रहे थे.

ये बिल्कुल बूथ लेवल के वर्कर्स थे. इस तरह की सभाएं कई गॉंवों में आयोजित की जा रही थीं. ये सभाएं सालों से लगभग ठप चुके कांग्रेस पार्टी के ढांचे को दोबारा ज़िन्दा करने के लिए की जा रही थीं.

यूथ कांग्रेस के स्थानीय नेता तनुज पुनिया काफ़ी जोश में कहने लगे, "इन गॉंवों में लोग हमारी पार्टी के साथ हज़ारों की संख्या में जुड़ रहे हैं"

हाल में छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में पार्टी की सरकारें बनने के बाद, दूसरे राज्यों की तरह, उत्तर प्रदेश में पार्टी के कार्यकर्ताओं में एक नया जोश देखने को मिल रहा है.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी लगभग तीन दशकों से सत्ता में नहीं है लेकिन अब इसके दोबारा जीवित होने के आसार नज़र आ रहे हैं. प्रियंका गांधी के पार्टी में शामिल होने से कार्यकर्ताओं का हौसला और भी बुलंद हो गया है.

कांग्रेस ने आगामी लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है. हाल ही में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक किसान रैली में लोगों से यह वादा भी किया है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद अगर उनकी सरकार बनी तो वह सभी ग़रीबों के लिए एक न्यूनतम आमदनी का इंतज़ाम करेंगे.

विशेषज्ञ कहते हैं कि प्रधानमंत्री किसानों के लिए एक बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा करने वाले थे. लेकिन राहुल गांधी ने इससे पहले न्यूनतम आमदनी का एलान करके बीजेपी सरकार को मात देने की कोशिश की है.

मैंने उत्तर प्रदेश के अपने हाल के दौरे में ये महसूस किया कि कांग्रेस पार्टी एक स्पष्ट रणनीति के तहत काम कर रही है, कुछ नीतियां देश भर के लिए हैं और कुछ अलग-अलग राज्यों के लिए.

पार्टी पहले चाहती थी कि वह आम चुनाव सपा और बसपा के साथ मिलकर लड़े लेकिन जब दोनों पार्टियों ने कांग्रेस को अपने गठबंधन में शामिल नहीं किया तो पार्टी ने प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का इंचार्ज बनाकर सियासी मैदान में उतारा. पार्टी के कार्यकर्ता इस फ़ैसले से बहुत ख़ुश हैं.

लोकसभा की सबसे अधिक 80 सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में पार्टी की रणनीति काफ़ी सोची-समझी और स्पष्ट नज़र आती है.

पार्टी प्रवक्ता और इसके वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रताप सिंह कहते हैं, "राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में अभी नीचे से काम शुरू किया है. मतलब ब्लॉक अध्यक्ष, ज़िलाध्यक्ष स्तर से. और वो स्थानीय लोगों की सहमति से बना है. ये नहीं कि दिल्ली और लखनऊ से सब तय हो गया."

उत्तर प्रदेश में पार्टी की रणनीति के कुछ मुख्य बिंदु ये हैं:

*उत्तर प्रदेश पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण है. यहाँ दूसरे राज्यों के मुक़ाबले पार्टी का किसानों पर ध्यान थोड़ा अधिक है. पार्टी के अनुसार किसान मोदी सरकार से नाराज़ है जिससे फ़ायदा उठाया जाए.

*पार्टी में ये भी सोच आम है कि किसानों की तरह युवा पीढ़ी भी मोदी सरकार से ख़फ़ा है. इसलिए नई नस्ल के लोगों को लुभाने की अधिक कोशिश की जाए.

*बसपा और सपा से सीधी टक्कर न ली जाए और कोशिश हो कि 2009 के लोकसभा चुनाव की तरह 21 या इससे अधिक सीटें जीती जाएँ.

*नए भर्ती होने वाले कार्यकर्ता किसान समुदाय से अधिक हों.

*पार्टी में महिलाओं के लिए आरक्षण पहले से है लेकिन उन्हें तालुका और ज़िला स्तर पर अहम पदों पर बैठाया जाए.

बाराबंकी की जिन सभाओं में मैं गया वहां बहुसंख्यक किसान थे. राज्यसभा सांसद पीएल पुनिया यहाँ से 2009 में चुनाव जीते थे. लेकिन पिछले चुनाव में मोदी लहर के कारण उनकी हार हुई थी.

उनके बेटे तनुज पुनिया ने दावा किया कि अध्यक्ष राहुल गांधी किसानों का दर्द समझते हैं, "उन्होंने किसानों की ज़रूरतों को समझा, ये समझा कि वो आत्महत्या करने पर क्यों मजबूर हैं. उनके नेतृत्व में पंजाब, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में क़र्ज़ माफ़ी की गयी है, उससे भारी संख्या में किसान अब कांग्रेस की तरफ़ आ रहे हैं"

एक समय था जब उत्तर प्रदेश में पार्टी को चुनाव में हराना कठिन था. पार्टी के बुरे दिन 1989 लोकसभा चुनाव के समय से आये. उस साल हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी को केवल 15 सीटें मिली थीं.

वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र नाथ भट कहते हैं, "पार्टी का पतन उस समय से शुरू हुआ जब वीपी सिंह ने 1989 के बाद मंडल रिपोर्ट को लागू किया उसी दौर में बसपा और बाद में सपा का उदय हुआ. और 1986 में राम मंदिर का ताला खुला, मंडल, दलित और सांप्रदायिक राजनीति, इन तीनों फैक्टर का कांग्रेस सामना नहीं कर सकी."

Monday, February 4, 2019

फेसबुक की वैल्यू आज 34 लाख करोड़ रु, 13 साल पहले याहू इसे 7100 करोड़ में खरीदना चाहती थी

दुनियाभर में 232 करोड़ यूजर वाली फेसबुक (एफबी) ने सोमवार को 15 साल पूरे कर लिए हैं। इसकी शुरुआत कॉलेज स्टूडेंट्स की नेटवर्किंग के लिए हुई थी। आज यह 34 लाख करोड़ रुपए की कंपनी है। फेसबुक की लॉन्चिंग के 2 साल बाद याहू ने इसे 7100 करोड़ रुपए में खरीदने का ऑफर दिया था, लेकिन एफबी के फाउंडर मार्क जकरबर्ग को लगा कि याहू ने वैल्यू कम आंकी है, इसलिए डील करने से इनकार कर दिया था।

फेसबुक की मौजूदा वैल्यू आज याहू की पेरेंट कंपनी वेरिजॉन कम्युनिकेशंस से दोगुनी है। वेरिजॉन का मार्केट कैप 16 लाख करोड़ रुपए है। इसने 2017 में याहू को 34,080 करोड़ रुपए में खरीद लिया था।

फेसबुक: 15 साल में 15 बड़ी घटनाएं
फरवरी 2004: 1 महीने में पॉपुलर हो गई फेसबुक
मार्क जकरबर्ग, डस्टिन मोस्कोविट्ज, क्रिस हगेस और एडुआर्डो सेवेरिन ने हार्वर्ड के छात्रों के लिए 4 फरवरी 2004 को फेसबुक लॉन्च की। एक महीने बाद इसकी रीच येल, कोलंबिया और स्टैनफोर्ड के स्टूडेंट्स तक बढ़ा दी गई। फेसबुक जल्द ही अमेरिका के कॉलेज कैंपसों में पॉपुलर हो गई।

जून 2004: 355 करोड़ रुपए का पहला निवेश
फेसबुक को आगे बढ़ाने के लिए जकरबर्ग ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी छोड़कर कैलिफॉर्निया के पालो अल्टो में किराए का घर ले लिया। जकरबर्ग ने ऑनलाइन म्यूजिक सर्विसेज फर्म नेप्सटर के सीन पार्कर को टीम में शामिल किया। इसी दौरान पेपल के को-फाउंडर पीटर थील ने फेसबुक में 355 करोड़ रुपए (5 लाख डॉलर) का निवेश किया।

फेसबुक ने द वॉल फीचर लॉन्च किया। जहां यूजर के दोस्त और फैन मैसेज पोस्ट कर सकें। यह फीचर काफी पसंद किया गया। 1 दिसंबर 2005 को फेसबुक ने ऐलान कर दिया कि उसका एक्टिव यूजर बेस 10 लाख हो चुका है।

जुलाई 2006: याहू ने खरीदने का ऑफर दिया
याहू ने 7100 करोड़ रुपए में फेसबुक का खरीदने का प्रस्ताव दिया। लेकिन, जकरबर्ग को फेसबुक की क्षमताओं और कीमत का अंदाजा था इसलिए उन्होंने याहू के ऑफर को अंडरवैल्यू बताकर खारिज कर दिया।

अक्टूबर 2007: माइक्रोसॉफ्ट ने 1.6% शेयर खरीदे
माइक्रोसॉफ्ट ने 1,704 करोड़ रुपए (24 करोड़ डॉलर) में फेसबुक की 1.6% हिस्सेदारी खरीद ली। इस निवेश के बाद फेसबुक की वैल्यू 15 बिलियन डॉलर हो गई थी। इसके एक महीने बाद फेसबुक ने बीकॉन ऐड प्रोग्राम लॉन्च किया। इसके जरिए एफबी यूजर की आदतों को ट्रैक किया जाने लगा। प्राइवेसी की चिंताओं की वजह से बीकॉन पर काफी विवाद हुआ था।

मार्च 2008: पहली बड़ी नियुक्ति
गूगल से शेरिल सैंडबर्ग को सीओओ नियुक्त किया। इससे पहले सैंडबर्ग गूगल में थीं। उन्हें राजनीति की समझ भी थी क्योंकि गूगल से पहले वो बिल क्लिंटन के समय यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट की चीफ ऑफ स्टाफ रह चुकी थीं।

दिसंबर 2010: सोशल मीडिया की ताकत सामने आई
ट्यूनीशिया में तानाशाही चलाने वाले जिने अल आबेदीन बेन अली को गद्दी से हटाने का संघर्ष शुरु हुआ। इससे पूरे अरब क्षेत्र में बदलाव की लहर फैल गई। लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। मध्य-पूर्व में इस क्रांति को आगे बढ़ाने का श्रेय फेसबुक को भी जाता है।

अप्रैल 2012: पहला बड़ा अधिग्रहण
फेसबुक ने 7,100 करोड़ रुपए (100 करोड़ डॉलर) में इंस्टाग्राम को खरीद लिया। इस डील काफी अहम थी। क्योंकि, उन दिनों सोशल मीडिया साइट स्नेपचैट का असर बढ़ रहा था। 

मई 2012: टेक कंपनी का सबसे बड़ा आईपीओ
फेसबुक ने आईपीओ के जरिए 1.13 लाख करोड़ रुपए (1,600 करोड़ डॉलर) की रकम जुटाई। यह किसी टेक्नोलॉजी कंपनी का सबसे बड़ा आईपीओ था। 18 मई 2012 को फेसबुक का शेयर अमेरिकी शेयर बाजार में 38 डॉलर के भाव पर लिस्ट हुआ।

फेसबुक की लिस्टिंग के अगले ही दिन 19 मई 2012 को मार्क जकरबर्ग ने गर्लफ्रेंड प्रिसिला चान से शादी कर ली।

सितंबर 2012: फेसबुक के शेयर में पहली बड़ी गिरावट
फेसबुक के शेयर में बड़ी गिरावट आई। यह 18 डॉलर से नीचे फिसलकर सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। मोबाइल यूजर्स से कमाई को लेकर चिंताओं की वजह से ऐसा हुआ था।

फरवरी 2014: सबसे महंगा अधिग्रहण
फेसबुक ने 1.34 लाख करोड़ रुपए (1,900 करोड़ डॉलर) में वॉट्सऐप को खरीद लिया। इसके 150 करोड़ से ज्यादा यूजर हैं।

जून 2017: यूजर बेस 200 करोड़ हुआ
फेसबुक के मंथली एक्टिव यूजर्स की संख्या 200 करोड़ हो गई। यह किसी इंटरनेट कंपनी के लिए बड़ा आंकड़ा है।

मार्च 2018: सबसे बड़ा विवाद
2016 में डोनाल्ड ट्रम्प के चुनावी अभियान के लिए काम करने वाली फर्म कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के 8.7 करोड़ यूजर का डेटा हासिल किया था। पिछले साल मार्च में इसका खुलासा हुआ था। इसकी वजह से दुनियाभर के लोगों का फेसबुक पर भरोसा कम हुआ। खुलासे के अगले कुछ महीनों में एफबी की यूजर संख्या घट गई थी। इस विवाद की वजह से फेसबुक के शेयर में भी भारी गिरावट आई थी।

नवंबर 2018: जकरबर्ग ने सीईओ का पद छोड़ने से इनकार किया
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि फेसबुक ने एपल जैसी कंपनियों के दुष्प्रचार के लिए पीआर फर्म को हायर किया था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कंपनी की सीओओ शेरिल सैंडबर्ग को इसका पता था। इसके बाद जकरबर्ग पर सीईओ का पद छोड़ने का दबाव बढ़ गया। जकरबर्ग ने पहली बार कहा कि वो पद नहीं छोड़ेंगे।

Friday, February 1, 2019

台湾人过新年:走一趟台北年货大街

农历猪年即将到来,台湾人过农历年也会采办年货,最著名的就是台北迪化街的年货大街,过年前每天都吸引满满的人潮。

19世纪末,迪化街是大稻埕(今台北市大同区)最繁忙的街市,靠近淡水河,设有大稻埕河港,是重要的通商口岸,也是茶叶、布匹、中药和南北货的集散地。

从清末开始,迪化街就是大稻埕商圈的中心,到了日治时期,仍然维持旧有的活跃商业风貌。

也正是因为迪化街商业活动兴盛,孕育出许多历史悠久的老字号企业,也使得过去迪化街有台北华尔街之称。

保留历史
但是随着淡水河淤塞货运功能大减,再加上都市发展和转移,台北市的商业活动逐渐向东发展,大稻埕也慢慢的成为老旧城区。

过去狭窄的街道空间不足,老旧建筑亟待整建,1970年代迪化街被台北市政府列为街道拓宽计划之内,按计划街道两旁的古老建筑将全数被拆除。

迪化街拓宽案因为要拆除许多富有古迹历史价值的老房子而在当时引起很大争议,前后历经10多年的存废讨论,终于在1995年最终确定保留原有迪化街历史建筑物。

到了1996年,时任台北市长的陈水扁,开启“年货大街”计划,藉由年货销售来推展促进当地经济,为100多年历史的迪化街再度注入新生命。

如今,每到农历年前,迪化街就化身成为年货大街,举凡过年必备的各式糖果、瓜子、糕饼、零食等,还有应景的年节布置、红包、对联等,在这里都一应俱全。

在历经商业活动和人潮转移,沉寂了一段时间之后,迪化街现在也以年货大街再度打响知名度,只要提到办年货,全台湾知名度最高的恐怕就是迪化街的年货大街了。

根据台湾社群网站痞客邦的调查,迪化街是台湾人办年货的首选,有超过40%的网友投票支持,而每年年货大街活动也吸引超过100万的参访人次。

超过20年的年货大街活动近年来也面临电子商务兴起的挑战,再加上许多年轻人不按照传统习俗过年,使得年货大街不如往年鼎盛时期的风光。

但是在农历年前走一趟迪化街的年货大街,你能够亲身感受到传统过年的热闹气氛,商贩们用扩音器的叫卖声,还有店家提供的免费试吃,这些都是网络电子商务感受不到体验。

而迪化街见证台北开城的百多年历史,多次兴衰和年货大街的转型发展,迪化街的文化历史价值却更是无法取代的。