Sunday, December 16, 2018

किसान क्यों रो रहे हैं प्याज़ के आंसू

बाज़ार में भले ही प्याज़ 20 से 30 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रहा है लेकिन प्याज की खेती में जुटे किसान इसकी लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं.

उनकी हालत इस कदर ख़राब है कि प्याज़ की कीमत गिरने के बाद से दो किसानों ने आत्महत्या कर ली है.

अपनी समस्या देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचाने के लिए एक किसान ने 750 किलो प्याज़ बेचने के बाद मिले पैसों को पीएम नरेंद्र मोदी को भेज दिया.

ठीक ऐसे ही महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले के संगमनेर तहसील के एक किसान ने प्याज़ बेचने के बाद मिले पैसों को वहां के मुख्यमंत्री को भेज दिया.

ख़बर तो यहां तक आई कि किसानों को अपने प्याज़ की कीमत 50 पैसे प्रति किलो की दर से भी नहीं मिल रहे हैं और गिरते भाव से बेहाल प्याज़ के किसान इसे सड़कों पर फेंक रहे हैं.

ये वो ख़बरें हैं जो पिछले कुछ दिनों के दौरान प्याज़ की खेती में लगे किसानों की बदहाल स्थिति बताती हैं. स्थिति ये है कि आज पूरे देश में प्याज़ के पैदावार की लागत और इसकी बिक्री से होने वाली कमाई में कोई संतुलन नहीं है. स्वाभाविक रूप से, जो किसान पहले से गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे थे उनके हालात और भी असहज हो गए हैं.

पिछले हफ़्ते, नासिक ज़िले के एक किसान संजय साठे इस उम्मीद से बाज़ार पहुंचे कि उनके प्याज़ की अच्छी कीमत मिलेगी. लेकिन, हुआ इसके उलट. 750 किलो प्याज़ बेचने के बाद उन्हें केवल 1064 रुपये मिले. यदि ट्रैक्टर का भाड़ा और मजदूरी को इसमें से घटाएं तो उनकी कमाई कितनी हुई. साठे ने फौरन ही इस हुई कमाई का मनीऑर्डर बनाया और प्रधानमंत्री के दफ़्तर पीएमओ भेज दिया. मामले की जांच के बाद पीएमओ ने वो पैसा उन्हें वापस भेज दिया.

उनके विरोध का यह तरीका मीडिया में चर्चा का विषय बन गया लेकिन इसके बाद दो और ख़बरें आईं. 6 और 7 दिसंबर को नासिक ज़िले के बगलान तहसील में प्याज़ की खेती करने वाले दो किसानों ने आत्महत्या कर ली.

आत्महत्या करने वाले किसानों की पहचान भादाने गांव के तात्याभाउ खैरनार (44) और सारदे गांव के युवा किसान प्रमोद धोंगडे (33) के तौर पर हुई. खैरनार ने तो वहां आत्महत्या की जहां उन्होंने प्याज़ का गोदाम बना रखा था.

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