Thursday, November 1, 2018

यू-टर्न लेने में माहिर हैं गठबंधन के उस्ताद नायडू

आख़िरकार 15 साल के अंतराल के बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगू देशम पार्टी के प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में वापसी करने के लिए तैयार हैं.

गुरुवार को उनकी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ हुई बैठक और उसके बाद आगामी चुनाव में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात ने बीजेपी के लिए मुश्किलें तो ज़रूर पैदा कर दी हैं.

पिछले एक-डेढ साल से कई क्षेत्रीय नेता तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिशें कर रहे हैं लेकिन इनमें से किसी ने भी नायडू की तरह तत्परता नहीं दिखाई.

69 साल के नायडू को गठबंधन बनाने में एक तरह से महारथ हासिल है.

साल 1996 में कर्नाटक के नेता एच डी देवेगौड़ा को प्रधानमंत्री पद तक पहुँचाने के लिए जिस सेक्युलर मोर्चे को श्रेय दिया जाता है उसमें तमाम अलग-अलग पार्टियों को एकजुट करने का अहम काम नायडू ने ही किया था.

इसके महज दो साल बाद ही नायडू ने जबरदस्त यू-टर्न लेते हुए दक्षिणपंथी विचारधारा वाले दल बीजेपी के साथ मिलकर देश की पहली एनडीए सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई जिसके चलते अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने.

साल 2004 में जब उनकी पार्टी को आंध्र प्रदेश में हार का सामना करना पड़ा और उसके बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन को भी हार मिली तो नायडू ने इस हार का ठीकरा साम्प्रदायिक छवि वाली बीजेपी और गुजरात दंगों पर फोड़ने में ज़रा सी भी देर नहीं लगाई.

शुरुआत कांग्रेस से ही
आंध्र के इस धुरंधर नेता के लिए विचारधारा या निजी विश्वास ने कभी बहुत ज़्यादा मायने नहीं रखा.

जिन लोगों को नायडू का अपने कड़े प्रतिद्वंदी रहे राहुल गांधी के साथ खड़े होना अचरज भरा लग रहा है उन्हें याद करना चाहिए कि नायडू ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 1978 में कांग्रेस के टिकट से आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़कर ही की थी.

साल 1980 में वे राज्य की कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रहे थे जिसके चलते वे तेलुगू फ़िल्मों में बड़ा नाम रखने वाले एनटी रामाराव की बेटी से शादी भी कर सके.

साल 1982 में एनटीआर ने अपनी क्षेत्रीय पार्टी तेलुगू देशम पार्टी बनाई और कांग्रेस को उसी गढ़ में मात देने में कामयाबी पाई.

हालांकि उस समय नायडू ने एनटीआर की बजाय कांग्रेस का साथ दिया और उसी के टिकट पर चुनाव भी लड़ा, जिसमें वे हार गए.

एनटीआर की परछाई
इस हार ने नायडू को टीडीपी में जाने की सीख दी.

इसके बाद जब साल 1984 में इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ने 19 महीने पहले बनी एनटीआर को गिराने की कोशिश की तो नायडू ने ही गैर-कांग्रेसी ताकतों को इकट्ठा कर एनटीआर की सरकार को बचाया.

इस दौरान नायडू एनटीआर की परछाई के तौर पर काम करते रहे.

लेकिन नायडू ही वही व्यक्ति भी थे जिन्होंने साल 1995 में एनटीआर को दखल कर टीडीपी प्रमुख का पदभार संभाला साथ ही राज्य के मुख्यमंत्री भी बने.

साल 2014 में आंध्र प्रदेश के दो हिस्से हो जाने के बाद नायडू उन्हीं नरेंद्र मोदी के साथ हाथ मिलाने के लिए भी तैयार हो जिन्हें उन्होंने 10 साल पहले साल 2004 में बीजेपी गठबंधन की हार का ज़िम्मेदार ठहराया था.

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