गया. बोधगया में एक ऐसा कब्रिस्तान है, जहां जानवर दफनाए जाते हैं। इसे बनाया है लावारिस पशुओं के लिए अपनी जिंदगी समर्पित कर चुकीं इटली की एड्रियाना फ्रेंटी ने। इसके लिए उन्होंने 10 कट्ठे (करीब 7200 वर्ग फीट) जमीन खरीदी था। पशुओं के लिए उन्होंने अपने घर को ही अस्पताल का रूप दिया है, यहां लावारिस जानवरों खासतौर पर स्ट्रीट डॉग्स का इलाज किया जाता है।
एड्रियाना फ्रेंटी 1982 में इटली से बोधगया घूमने भारत आई थीं। यहां की संस्कृति से प्रभावित होकर उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया। बोधगया के ग्रामीण इलाके में 1991 में सफर के दौरान उन्होंने एक लावारिस कुत्तेे के शव को नदी किनारे फेंके जाते देखा। यह देखने के बाद उन्होंने जानवरों के इलाज और उन्हें सम्मानपूर्वक दफनाए जाने का इंतजाम करने की ठानी। इसके बाद उन्होंने धंधवा गांव के रास्ते में जमीन खरीदी और जानवरों का अस्पताल खोला।
यहां अब तक दफन किए जा चुके हैं 3 हजार से ज्यादा जानवर
जानवरों का यह कब्रिस्तान 1992 से अस्तित्त्व में है। कब्रिस्तान में दफन किए जाने के बाद जानवरों की पहचान के लिए एक तख्ती लगाई जाती है, इसमें उनके नाम और उन्हें यहां लाने की तारीख लिखी रहती है। जानवरों के शवों को धार्मिक कर्मकांड के बाद दफनाया जाता है। उन्हें पाली भाषा में लिखे मंत्र के कागज और भगवान बुद्ध को चढ़ाए गए चीवर से ढका जाता है। शव को कंधे पर लेकर संस्था में बने बौद्ध स्तूप की तीन या पांच परिक्रमा करवाई जाती हैं। 27 सालों से यहां गाय, कुत्ता, बकरी, मुर्गी, मछली, कछुआ, खरगोश, पेड़ से मरकर गिरे पक्षियों समेत करीब तीन हजार से भी अधिक जानवरों को इस कब्रिस्तान में दफनाया गया है।
बीमार जानवरों को ग्रामीण और शहरी इलाके से लाते हैं
जानवरों के संरक्षण में लगीं एड्रियाना फ्रेंटी की संस्था के कर्मचारी ग्रामीण और शहरी इलाकों से लावारिस बीमार जानवरों को लाते हैं और उन्हें संस्था के अस्पताल में रखकर इलाज किया जाता है। साथ ही जरूरत पड़ने पर कुशल चिकित्सक के द्वारा पशुओं का ऑपरेशन भी किया जाता है। उसे संस्था में पूरी तरह ठीक होने तक रखा जाता है। फिर उसे उसके इलाके में ले जाकर छोड़ दिया जाता है। अधिक बीमारी के कारण जो जानवर मर जाता है। तय जमीन पर दफन किया जाता है।
एडिस अबाबा. इथियोपिया में रविवार को हुए विमान हादसे में 157 लोगों की मौत हो गई। इसमें चार भारतीय समेत 35 देशों के नागरिक शामिल थे। हालांकि, ग्रीस के एंटोनियो मावरोपोउलोस खुशकिस्मत रहे कि वे सिर्फ दो मिनट की देरी से पहुंचे, लिहाजा उन्हें डिपार्चर ग्रेट से अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने सुरक्षा गार्ड से विरोध भी जताया। बाद में विमान क्रैश हो जाने की बात चलने पर उन्होंने फेसबुक पर लिखा- आज मेरा भाग्यशाली दिन था।
संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम में हिस्सा लेने जाना था नैरोबी
एथेंस न्यूज एजेंसी के मुताबिक, एंटोनिस एक गैर सरकारी संस्था इंटरनेशनल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के प्रेसिडेंट हैं। उन्हें नैरोबी में संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम में जाना था। इसके लिए उन्होंने रविवार की ईटी 302 फ्लाइट बुक की। हालांकि, एयरपोर्ट पहुंचने के बाद डिपार्चर गेट तक पहुंचने में उन्हें दो मिनट की देर हो गई। इसके चलते एंटोनिस की फ्लाइट छूट गई।
फेसबुक पोस्ट में एंटोनिस ने लिखा, “मैं पहले काफी गुस्से में था, क्योंकि डिपार्चर गेट तक पहुंचने में किसी ने मेरी मदद नहीं की थी।” इसी पोस्ट में उन्होंने फ्लाइट की टिकट की फोटो के साथ लिखा, “आज मेरा भाग्याशाली दिन था।”
फ्लाइट क्रैश के बाद दूसरे विमान में चढ़ने से रोका गया
एंटोनिस ने बताया कि लेट होने के बाद उन्होंने कार्यक्रम में जाने के लिए दूसरी फ्लाइट का टिकट बुक किया। हालांकि, सुरक्षाकर्मी उन्हें एयरपोर्ट के पुलिस स्टेशन ले गए, जहां अधिकारियों ने उन्हें विमान के क्रैश होने की बात बताई और विरोध करने से मना किया। इसके बाद एयरपोर्ट के अफसरों ने एंटोनिस से पूछताछ की, क्योंकि इतने यात्रियों में सिर्फ वही थे जिनकी फ्लाइट छूटी थी।
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