पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की पुलिस के मुताबिक लाहौर की प्रमुख सूफ़ी दरगाह दाता दरबार के बाहर बुधवार को हुए आत्मघाती हमले में आठ लोगों की मौत हो गई. मरने वालों में पांच पुलिसकर्मी शामिल हैं.
पुलिस के मुताबिक हमले में 25 लोग घायल भी हुए हैं. घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल कराया गया है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने धमाके की निंदा की है.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़ हमले में पुलिस की एक गाड़ी को निशाना बनाया गया.
धमाके के बाद से इलाक़े में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी पहुंच गए हैं और पूरे क्षेत्र की तलाशी ली जा रही है.
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की पुलिस के आईजी आरिफ नवाज़ के मुताबिक ये आत्मघाती हमला था जिसमें पुलिस को निशाना बनाया गया.
उन्होंने मीडिया से कहा, "पुलिस को निशाना बनाकर हमला किया गया. वो (हमलावर) जिस साइड से आया, ज़्यादा नुकसान भी कर सकता था. पुलिस की गाड़ी जो यहां तैनात होती है, उसे आकर टार्गेट किया. "
उन्होंने कहा कि तमाम एजेंसियां जांच में जुटी हैं और सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं.
रेडियो पाकिस्तान के मुताबिक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने धमाके की निंदा की है. उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि वो घायलों को इलाज की उम्दा सुविधा मुहैया कराएं.
दाता दरबार दरगाह दक्षिण एशिया की सबसे पुरानी दरगाहों में से एक है.
यहां रोज़ाना हज़ारों लोग दर्शन के लिए आते हैं. दर्शन करने वालों में सुन्नी और शिया मुसलमानों के अलावा ग़ैर-मुस्लिमों की भी बड़ी तादाद होती है.
ये धमाका रमज़ान के महीने में हुआ है. लाहौर पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है.
साल 2010 में भी यहां धमाके हुए थे जिनमें 42 लोगों की मौत हुई थी.
पूर्व आर्मी चीफ़ दलबीर सिंह सुहाग भी इसी गांव से हैं. लगभग ढाई हज़ार की आबादी वाले इस गांव में फ़िलहाल 89 लोग रैंक अफ़सर हैं. सैकड़ों लोग सेना में काम कर रहे हैं. ये गांव रोहतक लोकसभा क्षेत्र में आता है.
गांव की चौपाल में हम पहुंचे तो थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि वहां कांग्रेस नेता और रोहतक संसदीय सीट से उम्मीदवार दीपेन्द्र हुड्डा के पोस्टर लगे थे और गांव के लोग उनका इंतज़ार कर रहे थे.
वहां तैयारियों में लगे थे सेना से रिटायर्ड सैनिक. देश में सेना को लेकर जो माहौल है, उससे अलग वे एक-एक कर अपनी समस्याएं बताने लगे.
रिटायर्ड कैप्टन राजेंद्र सुहाग 32 साल थल सेना की सर्विस में रहे. उनका कहना है कि वो नरेंद्र मोदी से बस इतनी विनती कर रहे हैं कि वो सच बोलें और देश को बेवक़ूफ़ ना बनाएं. उन्होंने वन रैंक वन पेंशन (OROP) लागू तो किया लेकिन इससे सिर्फ़ बड़ी रैंक वाले अफ़सरों को ही फ़ायदा हुआ.
वो कहते हैं, "एक जूनियर कमीशन ऑफ़िसर यानी जेसीओ की OROP में 298 रुपए से लेकर 900 रुपए की बढ़ोतरी हुई और वहीं अधिकारियों की पेंशन में 70,000 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई."
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